रासायनिक संयोग के नियम : द्रव्यमान संरक्षण या द्रव्य की अविनाशिता का नियम , द्रव्यमान संरक्षण के नियम का प्रयोगात्मक सत्यापन फास्फोरस का बंद पात्र में दहन

रासायनिक संयोग के नियम

पदार्थों का निर्माण विभिन्न परमाणुओं या अणुओं के मध्य रासायनिक अभिक्रिया के फलस्वरुप होता है ये अभिक्रियाए कुछ नियमों पर आधारित होती हैं जो रासायनिक संयोग के नियम कहलाते हैं अतः वे नियम जिनके आधार पर विभिन्न तत्व अथवा योगिक परस्पर संयोग करके नई यौगिको का निर्माण करते हैं रासायनिक संयोग के नियम कहलाते है।

द्रव्यमान संरक्षण या द्रव्य की अविनाशिता का नियम

इस नियम के अनुसार द्रव्य अविनाशी है। अर्थात रासायनिक अभिक्रिया में कोई द्रव्य न तो उत्पन्न होता है और न ही नष्ट होता है।

द्रव्यमान संरक्षण के नियम का प्रयोगात्मक सत्यापन

 फास्फोरस का बंद पात्र में दहन

एक बंद पात्र में थोड़ी बालू के ऊपर फास्फोरस को रखकर उसे तो लेते हैं तथा अब पात्र को गर्म करके तथा ठंडा करके उन्हें तोलते हैं गर्म करने पर फास्फोरस जलकर , फास्फोरस पेंन्टाआंक्साइड में परिवर्तित हो जाता है परंतु पात्र के भार में कोई परिवर्तन नहीं आता जिससे द्रव्यमान संरक्षण के नियम की पुष्टि होती है।

अपवाद

यह निम्न अभी के अभी कर रहा हूं पर लागू नहीं होता क्योंकि इन अभिक्रिया उनमें आइंस्टाइन के द्रव्यमान ऊर्जा समीकरण(E = mc2) के अनुसार द्रव्यमान को ऊर्जा में परिवर्तित किया जा सकता है।

स्थिर अनुपात का नियम

इस नियम के अनुसार प्रत्येक शुद्ध रासायनिक यौगिक में स्थित तत्व एक निश्चित भारानुपात में पाए जाते है। चाहे उसे किसी भी विधि से बनाया या प्राप्त किया जाए।

 उदाहरण-: कार्बन डाइऑक्साइड को चाहे किसी भी

 स्त्रोत द्वारा प्राप्त किया गया हो इसमें कार्बन तथा ऑक्सीजन का अनुपात सदैव 3:8 या 12:32 होता है।

स्थिर अनुपात के नियम का प्रयोगात्मक सत्यापन

एक कक्रूसीबल में कॉपर नाइट्रेट तथा एक में कॉपर कॉर्बोनेट को लेकर दोनों को गर्म करते हैं जिससे यह कॉपर ऑक्साइड में परिवर्तित हो जाते हैं अब कॉपर ऑक्साइड की एक नमूने  की कुछ मात्रा को दो छेद वाली कार्क लगी परखनली में लेकर तोल लेते हैं तथा इसे व्यवस्थित करके गर्म करते हुए इसमें हाइड्रोजन प्रवाहित करते हैं जिससे कॉपर ऑक्साइड शुष्क कापर में परिवर्तित हो जाता है अब हाइड्रोजन के प्रवाह को रोककर परखनली को ठंडा करके तोल लेते है। इस भार में से परखनली के प्रारंभ में लिए गए भार को घटाने पर कांपर का भार प्राप्त हो जाता है।

अपवाद

यह नियम समस्थानिको(तत्वों के ऐसे परमाणु जिनका परमाणु क्रमांक समान तथा परमाणु भार भिन्न हो) की स्थिति में लागू नहीं होता परंतु किसी निश्चित समस्थानिक द्वारा निर्मित योग्य को में इनके द्रव्यमानों का संगठन निश्चित होता परंतु किसी निश्चित समस्थानिक द्वारा निर्मित योगी को में इनके द्रव्यमानो का संगठन निश्चित होता है।

गुणित अनुपात का नियम

इस नियम के अनुसार जब दो तत्व पर इस पर मिल कर दो अथवा दो से अधिक रासायनिक यौगिक बनाते हैं तब एक तत्व की निश्चित मात्रा से सहयोग करने वाली दूसरे तत्व की भिन्न-भिन्न मात्राओं में एक सरल गुणित अनुपात होता है।

उदाहरण-: कार्बन तथा ऑक्सीजन परस्पर सहयोग कर कर के एक से अधिक योग्य को का निर्माण करते है।

गुणित अनुपात के नियम का प्रयोगात्मक सत्यापन

दो शुष्क क्रूसीबल लेकर उनमें से एक में 1 क्यूप्रिक ऑक्साइड तथा दूसरे में 1 ग्रामक् ऑक्साइड लेते हैं अभिनय दोनों ओर से खुली एक कठोर कठोर कान की नली में रख देते हैं तथा एक सिरे से नली में कॉल गैस प्रवाहित करते हैं इसके दूसरे सिरे पर कॉल गैस को जला देते हैं जिससे गैस का प्रवाह निरंतर बना रहता है कोल गैस गरम कॉपर ऑक्साइड को कॉपर में अब सहित कर देती है जैसे ही अपचयन पूर्ण होता है कृषीवल की अंदर वाली सतह चमकने लगती है दोनों पड़ोसी बलों से प्राप्त को पर के बालों को ज्ञात कर लेते हैं और शहीदों के बारे में से ऊपर की मात्रा को घटाकर संयुक्त हुए ऑक्सीजन की मात्रा को ज्ञात करने पर यह 1:2 के अनुपात में पाई जाती है जिससे गुणित अनुपात के नियम की पूष्टि होती है।

अपवाद

Leave a Comment